एक स्वीकारोक्ति : इन दिनों हुए माहौल के सन्दर्भ में

कुछ ढील कहूँ या खुद में शऊर की कमी राजकीय शिक्षक हुए उन्नीस साल हुए जाते हैं। राजकीय इसलिए जोड़ा कि खुद राजकीय विद्यालयों में पढ़ा। मुझे अच्छे शिक्षक नहीं…

रेखाओं से इस दुनिया को हसीन बनाती अनुप्रिया

जन्मदिन की शुभकामनाएँ ! कोई कैसे एक साथ माँ, पत्नी, कवयित्री, दोस्त, लेखक और चित्रकार हो सकता है? आप कह सकते हैं क्यों नहीं? मुझे एक बात और जोड़नी है…

हड्डी से पत्थर

एक शानदार किताब ! कैरेन हेडॉक कृत पुस्तक और पूजा तिवारी द्वारा अनुदित पुस्तक को एनबीटी ने प्रकाशित किया है । 2020 में प्रकाशित इस पुस्तक का दूसरा संस्करण 2021…

फिर भी बच्चे याद रखते हैं . . .

धर्मवीर बत्तीस साल बाद मिला धर्मवीर ! कद लगभग छह फुट ! सांवला रंग। दुबला-पतला शरीर। धूप-मिट्टी और रंग बदलते मौसम के साथ घुली-मिली गठी हुई देह। भाल और भौंहे…

इस दौर में इंसान का चेहरा नहीं मिलता

'इस दौर में इंसान का चेहरा नहीं मिलता। कब से मैं नक़ाबों की तहें खोल रहा हूँ।' जी हाँ। सुनीता उन्हीं में से एक है। जिन्हें इंसान पहचानने आते हैं।…

सामाजिक मनोदशा की नब्ज़ टटोलते हैं रामेंद्र कुशवाहा

जीना इसी का नाम: कथा संग्रह कहानीकार रामेन्द्र कुशवाहा की चौथी किताब कहानी संग्रह है। किताब का शीर्षक ‘जीना इसी का नाम’ है। महाराष्ट्र के मुंबई से हिन्दी में किताब…