विलियम्स शेक्सपियर कृत ‘मर्चेन्ट ऑफ वेनिस’ की सराहनीय प्रस्तुति

पौड़ी स्थित संस्कृति विभाग के प्रेक्षागृह में बी.जी.आर.कैम्पस के विद्यार्थी दर्शकों को चार सौ साल पहले के लोक जीवन में ले गए। उस दौर का देशकाल, परिस्थितियाँ, जीवन, मानवीय स्वभाव और वेनिस की पृष्ठभूमि को अंगीकृत करते हुए विलियम शेक्सपीयर कृत नाटक द मर्चेन्ट ऑफ वेनिस का सफल मंचन संभवतः शहर में पहली बार कराने का श्रेय अंग्रेजी विभाग के लिटरेरी लाइटहाउस क्लब को जाता है।

1596-97 में लिखे गए इस नाटक के मंचनोपरांत मुख्य अतिथि लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अधिकारी ने कहा कि नाटक विधा का मंचन प्राचीन सभ्यता का सूचक है। प्रबुद्ध रंगकर्मी मनोरंजन के साथ-साथ वस्तुस्थिति पर रोशनी डालने के लिए भी इस विधा का उपयोग करते आए हैं।

इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि डॉ. बीजीआर परिसर, एचएनबीजीयू के परिसर निदेशक, प्रो॰ डॉ॰ यू.सी.गैरोला ने कहा कि संस्कृति नगरी पौड़ी में विश्वप्रसिद्ध नाटक का मंचन अपने आप में विशेष है। युवा विद्यार्थी सूचना तकनीक के इस युग में यदि रंगमंच, साहित्य और कला के साथ अध्ययन करते हैं तो निश्चित तौर पर यह देश के हित में होगा। मंचन के प्रेक्षागृह में शहर के कई गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित रहे।

मूलतः पाँच अंकों के इस नाटक को मंचित करते हुए ढाई से तीन घण्टे का समय लगता है। लेकिन विद्यार्थियों ने वर्तमान परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए इसे सीमित किया। डेढ़ घण्टे से अधिक अवधि नाटक दर्शकों को बांधे रखने में कामयाब रहा। दृश्यांतर में लगने वाले समय और आरंभिक समय में ध्वनि समस्या को छोड़ दें तो प्रयोजन बेहद सफल रहा। हिन्दी और अंग्रेज़ी सहित कहीं-कहीं सूत्रधार के रूप में नाटक में एक चुड़ैल ने गढ़वाली शब्दावली का उपयोग करते हुए इसे और भी प्रासंगिक बना दिया।

इस नाटक को दर्शकों के मध्य लाने में कॉलेज के अंग्रेज़ी विभाग को श्रेय जाता है। कैम्पस पौड़ी में रचनात्मक गतिविधियों को बढ़ावा मिले इसके लिए बाक़ायदा विभागों में ग्रुपों की स्थापना की गई है। अंग्रेज़ी विभाग के डॉ. धर्मेंद्र कुमार ने कार्यक्रम का संचालन किया और नाटक के विषय का संक्षिप्त परिचय दिया। डॉ.धर्मेन्द्र कुमार और शोध छात्रा दीपाली का सहयोग सराहनीय रहा।

प्रस्तुत नाटक में तानिया ने पोर्शिया, अच्युतम ने बैसानियो, सार्थक ने एंटोनियो, शिवम ने शाइलॉक, दिव्यांशु ने ग्रेशियानो, श्वेता ने नेरिस्सा, श्रेयक ने लोरेंजो, दीया ने जेसिका, सृष्टि ने चुड़ैल एक और ऋषिका ने चुड़ैल दो का अभिनय किया। वहीं अनंत ने ड्यूक, प्रियांशु ने मोरक्को के राजकुमार, संगम ने एरागॉन के राजकुमार, कृश ने लॉन्सलॉट और शार्दुल ने पोर्शिया के नौकर की भूमिका निभाई। नाटक में दर्शकों को चार सौ साल पहले के देशकाल में ले जाने का सफल प्रयास किया गया। रहन-सहन, लहज़ा, परिवेश भी उस दौर का रखने का प्रयास किया गया। सभी विद्यार्थियों ने अपने-अपने पात्र के साथ कुशल निर्वाह करने की भरपूर कोशिश की। लिटरेरी लाइटहाउस क्लब का यह प्रयास सराहनीय है। कैंपस में साहित्यिक जागरूकता फैलाने और छात्रों को कलात्मक गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से इस कार्यक्रम का आयोजन किया, जिससे शिक्षा समग्र हो समृद्ध हो। क्लब नियमित कार्यक्रमों और गतिविधियों के माध्यम से साहित्य, रंगमंच और रचनात्मकता की संस्कृति को बढ़ावा दे रहा है।

ऐसा माना जाता है कि इस नाटक की रचना के समय शेक्सपियर दिली तौर पर बहुत उदास थे। कईयों का मानना है कि यह नाटक मनोरजंन के मक़सद को पूरा करता है। हास्य से भरा है। लेकिन दूसरा पक्ष यह भी है कि यह नाटक उदासी, प्रतिशोध, प्रपंच की ओर भी इशारा करता है। वेनिस की चमचमाती सड़कों पर जो धूप पड़ती है वही सच नहीं है। भीतर ही भीतर कुछ समुदायों में नफरत की ठंडी हवा भी चलती है। यहूदियों को आम नागरिक से इतर समझा जाता था। शेक्सपियर ने ठीक उसी जख्म पर उंगली रखी।

केन्द्रीय भाव है एक इंसान कितना अकेला हो सकता है। शाइलॉक का दर्द जब वह चीखता है। कहता है कि क्या यहूदी के पास आँखें नहीं होतीं? क्या उसका लहू लाल नहीं होता। सारा थिएटर सन्न रह जाता है। कथावस्तु बहुत सीधी है पर सोचने को बाध्य करती है। बैसानियो को पोर्शिया से प्यार है। उसके पास पैसे नहीं हैं। उसका दोस्त एंटोनियो कहता है,‘‘ तेरेे लिए जान दे दूँगा। वह शाइलॉक से उधार लेता है। पर शाइलॉक शर्त रखता है कि तीन महीने में रुपया नहीं लौटाया तो दिल के पास से एक पौंड मांस। जहाज डूबते हैं। एंटोनियो कंगाल खड़ा है। शाइलॉक चाकू लेकर आता है। उसकी आँखों में सैकड़ों साल की यातना का बदला है। बात अदालत तक पहुंचती है। तब पोर्शिया आती है। पुरुष का वेश बनाकर। उसका दया वाला भाषण सुनकर आज भी लोग रोते हैं। दया स्वर्ग से बरसती है।् पर जब वह शाइलॉक को कानून के जाल में फँसाकर सब कुछ छीन लेती है। मामला उलटा पड़ जाता है कि वह कहती है लहू न गिरे। मांस ले लो। बात दया पर आती है। सूदखोर को माफ कर दिया जाता है।

दुनिया में इसके लाखों बार मंचन हो चुके हैं। हर बार कोई नया शाइलॉक रोता है। हर बार कोई नई पोर्शिया दया माँगती है। हम इसे बार.बार खेलते हैं क्योंकि हम अभी तक तय नहीं कर पाए कि हम शाइलॉक हैं या एंटोनियो। हम अभी तक नहीं सीख पाए कि नफरत का जवाब दया से देना है या नहीं। जब तक इंसान इंसान को दूसरे दर्जे का समझेगा तब तक वेनिस की अदालत में शाइलॉक खड़ा रहेगा। और हम रोते रहेंगे। शोषण और शोषित की नज़र से दो हिस्सों में खड़े रहेंगे।

नाटक एलिजाबेथन काल की व्यस्त, व्यापारिक और धार्मिक तनावों से भरी वेनिस की पृष्ठभूमि में रचा गया है। उस समय यूरोप में यहूदी समुदाय के प्रति संदेह, ईसाई मूल्यों का दबाव और व्यापार की तेजी ज़ोरों पर थीं। इन सबने नाटक के कथ्य को गढ़ा।

नाटक के केंद्र में दया, न्याय, पूर्वाग्रह और मानवीयता की परीक्षा जैसे स्थायी विषय हैं। यही इसकी शक्ति है। यही इसे आज भी प्रासंगिक रखता है।
नाटक की कहानी सरल दिखाई देती है पर परतदार है।
एंटोनियो एक उदार व्यापारी। बैसानियो उसका प्रिय मित्र प्यार हासिल करने के लिए धन का मोहताज है। पोर्शिया एक बुद्धिमान विवेकी और दृढ़ नायिका। शायलॉक एक यहूदी साहूकार है। कथा का सबसे जटिल और चर्चित पात्र। शायलॉक का किरदार सबसे अहम् लगता है।

कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि विलियम शेक्सपियर कृत मर्चेन्ट ऑफ वेनिस नाटक के इस मंचन की मुक्त कण्ठ से सराहना की जानी चाहिए। प्रेम, दया, घृणा, वर्ग संघर्ष, प्रतिशोध, न्याय, तर्क, दया और क्षमा के बीच जो सामंजस्य या टकराव आज नया नहीं है। वेनिस के व्यापार समुद्री हलचल और क्षति के मध्य मानवता-प्रेम-छल का जो प्रदर्शन नाटक के जरिए प्रस्तुत किया गया वह काबिल-ए-तारीफ रहा।


मंचन की तिथि: 28 नवम्बर 2025
समय: 1 बजे दोपहरोपरांत
प्रस्तुति: मनोहर चमोली ‘मनु’

By manohar

परिचयः मनोहर चमोली ‘मनु’ जन्मः पलाम,टिहरी गढ़वाल,उत्तराखण्ड जन्म तिथिः 01-08-1973 प्रकाशित कृतियाँ ऐसे बदली नाक की नथः 2005, पृष्ठ संख्या-20, प्रकाशकः राष्ट्रीय पुस्तक न्यास,नई दिल्ली ऐसे बदला खानपुरः 2006, पृष्ठ संख्या-16, प्रकाशकः राज्य संसाधन केन्द्र (प्रौढ़ शिक्षा) 68/1,सूर्यलोक कॉलोनी,राजपुर रोड,देहरादून। सवाल दस रुपए का (4 कहानियाँ)ः 2007, पृष्ठ संख्या-40, प्रकाशकः भारत ज्ञान विज्ञान समिति,नई दिल्ली। उत्तराखण्ड की लोककथाएं (14 लोक कथाएँ)ः 2007, पृष्ठ संख्या-52, प्रकाशकः भारत ज्ञान विज्ञान समिति,नई दिल्ली। ख्खुशीः मार्च 2008, पृष्ठ संख्या-16, प्रकाशकः राज्य संसाधन केन्द्र (प्रौढ़ शिक्षा) 68/1,सूर्यलोक कॉलोनी,राजपुर रोड,देहरादून बदल गया मालवाः मार्च 2008, पृष्ठ संख्या-12, प्रकाशकः राज्य संसाधन केन्द्र (प्रौढ़ शिक्षा) 68/1,सूर्यलोक कॉलोनी,राजपुर रोड,देहरादून पूछेरीः 2009,पृष्ठ संख्या-16, प्रकाशकः राष्ट्रीय पुस्तक न्यास,नई दिल्ली बिगड़ी बात बनीः मार्च 2008, पृष्ठ संख्या-12, प्रकाशकः राज्य संसाधन केन्द्र (प्रौढ़ शिक्षा) 68/1,सूर्यलोक कॉलोनी,राजपुर रोड,देहरादून अब बजाओ तालीः 2009, पृष्ठ संख्या-12, प्रकाशकः राज्य संसाधन केन्द्र (प्रौढ़ शिक्षा) 68/1,सूर्यलोक कॉलोनी,राजपुर रोड,देहरादून। व्यवहारज्ञानं (मराठी में 4 कहानियाँ अनुदित,प्रो.साईनाथ पाचारणे)ः 2012, पृष्ठ संख्या-40, प्रकाशकः निखिल प्रकाशन,राजारामपुरी,8वीं गली,कोल्हापूर,महाराष्ट्र। अंतरिक्ष से आगे बचपनः (25 बाल कहानियाँ)ः 2013, पृष्ठ संख्या-104, आई॰एस॰बी॰एन॰ 978-81-86844-40-3 प्रकाशकः विनसर पब्लिशिंग कम्पनी,4 डिसपेंसरी रोड,देहरादून। कथाः ज्ञानाची चुणूक (मराठी में अनुदित)ः 2014, पृष्ठ संख्या-16, प्रकाशकः नारायणी प्रकाशन, कादंबरी,राजारामपुरी,8वीं गली,कोल्हापूर,महाराष्ट्र। कथाः उलटया हाताचा सलाम (मराठी में अनुदित)ः 2014, पृष्ठ संख्या-16, प्रकाशकः नारायणी प्रकाशन, कादंबरी,राजारामपुरी,8वीं गली,कोल्हापूर,महाराष्ट्र। कथाः पुस्तके परत आली (मराठी में अनुदित)ः 2014, पृष्ठ संख्या-16, प्रकाशकः नारायणी प्रकाशन, कादंबरी,राजारामपुरी,8वीं गली,कोल्हापूर,महाराष्ट्र। कथाः वाढदिवसाची भेट (मराठी में अनुदित)ः 2014, पृष्ठ संख्या-16, प्रकाशकः नारायणी प्रकाशन, कादंबरी,राजारामपुरी,8वीं गली,कोल्हापूर,महाराष्ट्र। कथाः सत्पात्री दान (मराठी में अनुदित)ः 2014, पृष्ठ संख्या-16, प्रकाशकः नारायणी प्रकाशन, कादंबरी,राजारामपुरी,8वीं गली,कोल्हापूर,महाराष्ट्र। कथाः मंगलावर होईल घर (मराठी में अनुदित)ः 2014, पृष्ठ संख्या-16, प्रकाशकः नारायणी प्रकाशन, कादंबरी,राजारामपुरी,8वीं गली,कोल्हापूर,महाराष्ट्र। कथाः सेवक तेनालीराम (मराठी में अनुदित)ः 2014, पृष्ठ संख्या-16, प्रकाशकः नारायणी प्रकाशन, कादंबरी,राजारामपुरी,8वीं गली,कोल्हापूर,महाराष्ट्र। कथाः असा जिंकला उंदीर (मराठी में अनुदित)ः 2014, पृष्ठ संख्या-16, प्रकाशकः नारायणी प्रकाशन, कादंबरी,राजारामपुरी,8वीं गली,कोल्हापूर,महाराष्ट्र। कथाः पिंपलांच झाड (मराठी में अनुदित)ः 2014, पृष्ठ संख्या-16, प्रकाशकः नारायणी प्रकाशन, कादंबरी,राजारामपुरी,8वीं गली,कोल्हापूर,महाराष्ट्र। कथाः खरं सौंदर्य (मराठी में अनुदित)ः 2014, पृष्ठ संख्या-16, प्रकाशकः नारायणी प्रकाशन, कादंबरी,राजारामपुरी,8वीं गली,कोल्हापूर,महाराष्ट्र। कथाः गुरुसेवा (मराठी में अनुदित)ः 2014, पृष्ठ संख्या-16, प्रकाशकः नारायणी प्रकाशन, कादंबरी,राजारामपुरी,8वीं गली,कोल्हापूर,महाराष्ट्र। कथाः खरी बचत (मराठी में अनुदित)ः 2014, पृष्ठ संख्या-16, प्रकाशकः नारायणी प्रकाशन, कादंबरी,राजारामपुरी,8वीं गली,कोल्हापूर,महाराष्ट्र। कथाः विहिरीत पडलेला मुकुट (मराठी में अनुदित)ः 2014, पृष्ठ संख्या-16, प्रकाशकः नारायणी प्रकाशन, कादंबरी,राजारामपुरी,8वीं गली,कोल्हापूर,महाराष्ट्र। कथाः शाही भोजनाचा आनंद (मराठी में अनुदित)ः 2014, पृष्ठ संख्या-16, प्रकाशकः नारायणी प्रकाशन, कादंबरी,राजारामपुरी,8वीं गली,कोल्हापूर,महाराष्ट्र। कथाः कामाची सवय (मराठी में अनुदित)ः 2014, पृष्ठ संख्या-16, प्रकाशकः नारायणी प्रकाशन, कादंबरी,राजारामपुरी,8वीं गली,कोल्हापूर,महाराष्ट्र। कथाः शेजायाशी संबंध (मराठी में अनुदित)ः 2014, पृष्ठ संख्या-16, प्रकाशकः नारायणी प्रकाशन, कादंबरी,राजारामपुरी,8वीं गली,कोल्हापूर,महाराष्ट्र। कथाः मास्क रोबोट (मराठी में अनुदित)ः 2014, पृष्ठ संख्या-16, प्रकाशकः नारायणी प्रकाशन, कादंबरी,राजारामपुरी,8वीं गली,कोल्हापूर,महाराष्ट्र। कथाः फेसबुकचा वापर (मराठी में अनुदित)ः 2014, पृष्ठ संख्या-16, प्रकाशकः नारायणी प्रकाशन, कादंबरी,राजारामपुरी,8वीं गली,कोल्हापूर,महाराष्ट्र। कथाः कलेचा सन्मान (मराठी में अनुदित)ः 2014, पृष्ठ संख्या-16, प्रकाशकः नारायणी प्रकाशन, कादंबरी,राजारामपुरी,8वीं गली,कोल्हापूर,महाराष्ट्र। कथाः सेवा हाच धर्म (मराठी में अनुदित)ः 2014, पृष्ठ संख्या-16, प्रकाशकः नारायणी प्रकाशन, कादंबरी,राजारामपुरी,8वीं गली,कोल्हापूर,महाराष्ट्र। कथाः खोटा सम्राट (मराठी में अनुदित)ः 2014, पृष्ठ संख्या-16, प्रकाशकः नारायणी प्रकाशन, कादंबरी,राजारामपुरी,8वीं गली,कोल्हापूर,महाराष्ट्र। कथाः ई साईबोर्ग दुनिया (मराठी में अनुदित)ः 2014, पृष्ठ संख्या-16, प्रकाशकः नारायणी प्रकाशन, कादंबरी,राजारामपुरी,8वीं गली,कोल्हापूर,महाराष्ट्र। कथाः पाहुण्यांचा सन्मान (मराठी में अनुदित)ः 2014, पृष्ठ संख्या-16, प्रकाशकः नारायणी प्रकाशन, कादंबरी,राजारामपुरी,8वीं गली,कोल्हापूर,महाराष्ट्र। जीवन में बचपनः ( 30 बाल कहानियाँ)ः 2015, पृष्ठ संख्या-120, आई॰एस॰बी॰एन॰ 978-81-86844-69-4 प्रकाशकः विनसर पब्लिशिंग कम्पनी,4 डिसपेंसरी रोड,देहरादून। उत्तराखण्ड की प्रतिनिधि लोककथाएं (समेकित 4 लोक कथाएँ)ः 2015, पृष्ठ संख्या-192, प्रकाशकः समय साक्ष्य,फालतू लाइन,देहरादून। रीडिंग कार्डः 2017, ऐसे चाटा दिमाग, किरमोला आसमान पर, सबसे बड़ा अण्डा, ( 3 कहानियाँ ) प्रकाशकः राज्य परियोजना कार्यालय,उत्तराखण्ड चित्र कथाः पढ़ें भारत के अन्तर्गत 13 कहानियाँ, वर्ष 2016, प्रकाशकः प्रथम बुक्स,भारत। चाँद का स्वेटरः 2012,पृष्ठ संख्या-24,पिक्चर बुक, आई॰एस॰बी॰एन॰ 978-93-81038-40-6 प्रकाशकः रूम टू रीड, इंडिया। बादल क्यों बरसता है?ः 2013,पृष्ठ संख्या-24,पिक्चर बुक, आई॰एस॰बी॰एन॰ 978-93-81038-79-6 प्रकाशकः रूम टू रीड, इंडिया। जूते और मोजेः 2016, पृष्ठ संख्या-24,पिक्चर बुक, आई॰एस॰बी॰एन॰ 978-93-84697-97-6 प्रकाशकः रूम टू रीड, इंडिया। अब तुम गए काम सेः 2016,पृष्ठ संख्या-24,पिक्चर बुक, आई॰एस॰बी॰एन॰ 978-93-84697-88-4 प्रकाशकः रूम टू रीड, इंडिया। चलता पहाड़ः 2016,पृष्ठ संख्या-24,पिक्चर बुक, आई॰एस॰बी॰एन॰ 978-93-84697-91-4 प्रकाशकः रूम टू रीड, इंडिया। बिल में क्या है?ः 2017,पृष्ठ संख्या-24,पिक्चर बुक, आई॰एस॰बी॰एन॰ 978-93-86808-20-2 प्रकाशकः रूम टू रीड, इंडिया। छस छस छसः 2019, पृष्ठ संख्या-24,पिक्चर बुक, आई॰एस॰बी॰एन॰ 978-93-89202-63-2 प्रकाशकः रूम टू रीड, इंडिया। कहानियाँ बाल मन कीः 2021, पृष्ठ संख्या-194, आई॰एस॰बी॰एन॰ 978-93-91081-23-2 प्रकाशकः श्वेतवर्णा प्रकाशन,दिल्ली पहली यात्रा: 2023 पृष्ठ संख्या-20 आई॰एस॰बी॰एन॰ 978-93-5743-178-1 प्रकाशक: राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत कथा किलकारी: दिसम्बर 2024, पृष्ठ संख्या-60, आई॰एस॰बी॰एन॰ 978-93-92829-39-0 प्रकाशक: साहित्य विमर्श प्रकाशन कथा पोथी बच्चों की: फरवरी 2025, पृष्ठ संख्या-136, विनसर पब्लिकेशन,देहरादून, उत्तराखण्ड, आई॰एस॰बी॰एन॰ 978-93-93658-55-5 कहानी ‘फूलों वाले बाबा’ उत्तराखण्ड में कक्षा पाँच की पाठ्य पुस्तक ‘बुराँश’ में शामिल। सहायक पुस्तक माला भाग-5 में नाटक मस्ती की पाठशाला शामिल। मधुकिरण भाग पांच में कहानी शामिल। परिवेश हिंदी पाठमाला एवं अभ्यास पुस्तिका 2023 में संस्मरण खुशबू आज भी याद है प्रकाशित पावनी हिंदी पाठ्यपुस्तक भाग 6 में संस्मरण ‘अगर वे उस दिन स्कूल आते तो’ प्रकाशित। (नई शिक्षा नीति 2020 के आलोक में।) हिमाचल सरकार के प्रेरणा कार्यक्रम सहित पढ़ने की आदत विकसित करने संबंधी कार्यक्रम के तहत छह राज्यों के बुनियादी स्कूलों में 13 कहानियां शामिल। राजस्थान, एस.सी.ई.आर.टी द्वारा 2025 में विकसित हिंदी पाठ्यपुस्तक की कक्षा पहली में कहानी ‘चलता पहाड़’ सम्मिलित। राजस्थान, एस.सी.ई.आर.टी द्वारा 2025 में विकसित हिंदी पाठ्यपुस्तक की कक्षा चौथी में निबंध ‘इसलिए गिरती हैं पत्तियाँ’ सम्मिलित। बीस से अधिक बाल कहानियां असमियां और बंगला में अनुदित। गंग ज्योति पत्रिका के पूर्व सह संपादक। ज्ञान विज्ञान बुलेटिन के पूर्व संपादक। पुस्तकों में हास्य व्यंग्य कथाएं, किलकारी, यमलोक का यात्री प्रकाशित। ईबुक ‘जीवन में बचपन प्रकाशित। पंचायत प्रशिक्षण संदर्शिका, अचल ज्योति, प्रवेशिका भाग 1, अचल ज्योति भाग 2, स्वेटर निर्माण प्रवेशिका लेखकीय सहयोग। उत्तराखण्ड की पाठ्य पुस्तक भाषा किरण, हँसी-खुशी एवं बुराँश में लेखन एवं संपादन। विविध शिक्षक संदर्शिकाओं में सह लेखन एवं संपादन। अमोली पाठ्य पुस्तक 8 में संस्मरण-खुशबू याद है प्रकाशित। उत्तराखण्ड के शिक्षा विभाग में भाषा के शिक्षक हैं। वर्तमान में: रा.इं.कॉ.कालेश्वर,पौड़ी गढ़वाल में नियुक्त हैं। सम्पर्कः गुरु भवन, पोस्ट बॉक्स-23 पौड़ी, पौड़ी गढ़वाल.उत्तराखण्ड 246001.उत्तराखण्ड. मोबाइल एवं व्हाट्सएप-7579111144 #manoharchamolimanu #मनोहर चमोली ‘मनु’

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