• मजाक अब नहीं

    गर्मी बहुत थी। इतनी गर्मी कि पेड़ों के पत्ते भी झुलस गए थे। गिद्ध ने अपने डैने फैलाये तो साँप बोल पड़ा,‘‘बारिश नहीं हुई। पानी के बिना जीवन नहीं। कई हैं जो मर…

  • ऐसे मिला सबक

    एक दिन की बात है। चूहे की माँ बोली,‘‘हमें अपने दाँतों को पैना रखना पड़ता है। लगातार कुछ न कुछ कुतरना होता है। तुम हो कि आलस करते हो। माना कि भर-पेट खाना…

  • छोड़ दिया फुदकना

    तब बिल्ली मेढक की तरह फुदकती थी। जब वह चलती तो उसके पैरों से टक-टक की आवाज आती। घोड़ा कई बार बिल्ली से कहता,‘‘दूर-दूर तक सबको पता चल जाता है कि तुम आ…

  • भूख से आगे

    -मनोहर चमोली ‘मनु’‘‘स्कूल की फुटबाॅल और खो-खो टीम के लिए अच्छी ख़बर है। हम एक बार फिर से राज्य के लिए खेलेंगे। क्या पता! अगर राज्य में ये टीमें जीत गईं तो हो…

  • सोचना सबके बारे में

    -मनोहर चमोली ‘मनु’आज से मासिक परीक्षा हैं। यह सोचकर अखिल जल्दी उठ गया। उसे चिड़ियों की चहचहाट सुनाई दी। वह आंगन में गया। आगन में करतार सिंह चावल के दाने बिखेर रहे थे।…

  • कैसी गलती किसकी गलती?

    -मनोहर चमोली ‘मनु’आभा की आँखें भर आईं। वह सोचने लगी,‘एक तो मैंने स्वरा पर हाथ उठाया। फिर उसे वाॅशरूम में बंद कर दिया।’ वह याद करने लगी कि हाथ उठाने की नौबत क्यों…

  • ऐसे लगाया ध्यान

    बयार पढ़ाई कर रही थी। लेकिन अंतरिक्ष की खटर-पटर में उसका ध्यान हट रहा था। तंग आकर उसने कह ही दिया,‘‘भैया। पढ़ ले। एग्जाम नजदीक आ रहे हैं। मैं हर बार तेरे आगे…

  • लगन

    कोरोना के कारण स्कूल बंद थे। आज जब स्कूल खुला तो बच्चे अपना स्कूल भी नहीं पहचान पा रहे थे। कोरोना के कारण घर में रहकर क्या-क्या परेशानियां हुईं। मोबाइल से उन्होंने क्या…

  • खाना मगर ध्यान से

    अभी ठीक से सुबह का उजाला भी नहीं हुआ था। महेश ने जोर से पुकारा,‘‘अरे रीता। सुनो तो।’’ तभी उसे अंदाज़ा हुआ कि अभी तो आस-पास के लोग सो रहे होंगे। महेश ने…

  • मुस्कराना हमेशा

    सलमा आज कुछ गमले ले आईं। नाहिदा ने पूछा,‘‘अम्मी। ये गमलें किस काम आएंगे?’’सलमा ने जवाब दिया,‘‘फूलों की पौध लगा रही हूँ। देखती रहो।’’सलमा ने गमलों में फूलों के पौधे लगाए। नाहिदा पूछने…

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