कैसी गलती किसकी गलती?


-मनोहर चमोली ‘मनु’
आभा की आँखें भर आईं। वह सोचने लगी,‘एक तो मैंने स्वरा पर हाथ उठाया। फिर उसे वाॅशरूम में बंद कर दिया।’ वह याद करने लगी कि हाथ उठाने की नौबत क्यों आई। लेकिन आभा को स्वरा की सिसकियां ही याद आईं। उसने सिसकते हुए आभा से कहा था,‘‘ आप भी दूसरों की मम्मी जैसी निकलीं।’’ आभा ने सोचा था कि स्वरा रोएगी। गिड़गिड़ाएगी। दोहराएगी-‘‘साॅरी मम्मी। अब ऐसी गलती नहीं करूंगी। कभी नहीं। प्लीज़। मुझे वाॅशरूम में बंद मत करो।’’ लेकिन ऐसा नहीं हुआ। आभा ने हाथ पकड़कर स्वरा को वाॅशरूम में बदं कर दिया था। फिर वह रसोई के काम में जुट गई।
उसे याद आया कि इस बात को बीते हुए एक घंटा हो चुका है। वाॅशरूम से स्वरा ने एक बार भी कुछ नहीं कहा था। रोने-चिल्लाने की बात तो बहुत दूर की थी।
अचानक आभा जैसे नींद से जागी हो। वह रसोई से दौड़कर सीधे वाॅशरूम के पास जा पहुंची। खट् से दरवाजा खोला। स्वरा एक कोने में दुबकी हुई थी। उसने अपना सिर दोनों घुटनों टिका रखा था।
‘‘स्वरा।’’ आभा ने आवाज लगाई। लेकिन स्वरा के शरीर में हरकत तक न हुई। आभा ने लपक कर स्वरा को पकड़ा। स्वरा नींद थी। आभा ने स्वरा के कांधे पकड़े और पूरी ताकत से उठा लिया। स्वरा आभा के बांये कांधे पर झूल रही थी। स्वरा नींद से जागी तो छूटते ही बोली-‘‘मम्मी। मुझे आपने क्यों मारा? वाॅशरूम में क्यों बंद किया?’’
यह सुनकर आभा का गला रुंध गया। लेकिन वह चुप रही। वह स्वरा को सीधे रसोई में ले गई। सहलाया-पुचकारा और गले से लगाए रखा।
दरअसल हुआ यह था कि आज स्वरा स्कूल से जल्दी लौट आई। उस समय घर में आभा नहीं थी। स्वरा के साथ उसकी सहपाठी सयारा भी थी। आभा ने घर की चावी पड़ोस में दी हुई थी। स्वरा और सयारा ने सबसे पहले स्कूल से मिला होमवर्क किया। फिर दोनों खेलने में मस्त हो गए। आभा जब घर लौटी तो सयारा जा चुकी थी। आभा ने देखा कि घर अस्त-व्यस्त नहीं था। आभा की नज़र दीवार पर टंगी करन की फोटो पर जाकर ठहर गई। आभा की चीख निकल गई। फोटो पर फूलांे की माला जो लगी हुई थी।
आभा ने कड़े स्वर में स्वरा से पूछा,‘‘ये क्या है? अपने पापा की फोटो पर माला पहना दी? पता है माला मर चुके इंसान की फोटो को पहनाते हैं!’’
स्वरा बोली,‘‘पर ममा। भगवान जी की फोटो और मूर्तियों में तो माला पहनाते हैं। चाचू ने अपनी शादी में चाची को भी तो माला पहनाई थी। हमारे स्कूल प्रोग्राम में चीफ गेस्ट को भी माला पहनाई गई थी। और….’’।
‘‘चुप। उतारो इसे।’’
आभा सिर पकड़कर बैठ गई। स्वरा स्टूल पर चढ़ गई। फोटो से माला उतारते हुए बोली,मैं और सयारा सिगरेट-सिगरेट खेल रहे थे।’’
आभा ने हैरानी से स्वरा की ओर देखा। स्वरा ने बताया,‘‘मम्मी। पापा खूब सारी सिगरेट पीते हैं। आप भी बार-बार बोलती हो कि सिगरेट छोड़ो। मैं और सयारा खेल में पापा को समझा रहे थे। वो मान ही नहीं रहे थे। खेल-खेल में फिर पापा मर गए। खेल तो खत्म हो गया लेकिन हम फोटो से माला उतारना भूल गए। और ……।’’ स्वरा अभी अपनी बात पूरी कर भी नहीं पाई थी कि आभा स्वरा पर बरस पड़ी। ‘चटाक! तड़-तड़ातड़।’ आज पहली बार आभा ने स्वरा पर हाथ उठाया था।
स्वरा ने फिर दोहराया-‘‘मम्मी। मुझे आपने क्यों मारा? वाॅशरूम में क्यों बंद किया?’’ आभा ने जवाब दिया- ‘‘पापा से पूछना कि मैंने आपको क्यों मारा?’’
‘‘पापा तो ड्यूटी पर हैं। पापा को कैसे पता चलेगा कि आपने मुझे क्यों मारा?’’
‘‘मैं बताऊंगी।’’
स्वरा एकटक आभा का मुंह ताकने लगी। आभा रसोई के काम मे जुट गई। शाम ढल चुकी थी। दरवाजे पर घंटी बजी। आभा ने दरवाजा खोला। करन को देखते ही आभा ने करन को सारा किस्सा सुनाया। करन ने पूछा-‘‘कहां है स्वरा?’’ आभा ने बताया-‘‘बगल वाले कमरे में है। टी॰वी॰ देख रही है।’’ करन तेज कदमों से बगल वाले कमरे में जा पहुंचा। करन ने पुकारा-‘‘स्वरा।’’ स्वरा के हाथ से रिमोट छूट गया। उसने दौड़कर टी॰वी॰ का स्विच आफ कर दिया।
विशाल के कुछ कहने से पहले ही स्वरा बोल पड़ी-‘‘पापा। मैम ने बताया था कि जो सिगरेट-पीते हैं, वह जल्दी मर जाते हैं। आज स्कूल में घण्टी बजाने वाले अंकल की फोटो पर टीचर्स और बच्चों ने फूल-माला चढ़ाई थी। बड़ी मैम ने बताया था कि सिगरेट पीना मतलब मर जाना होता है। साॅरी पापा। वो तो हम खेल रहे थे। अब यह गलती नहीं करूंगी।’’
पीछे-पीछे आभा भी आ गई। करन की आंखें भर आईं। उसने स्वरा को दोनों हाथों से उठाते हुए कहा-‘‘मेरी बच्ची। साॅरी तो मुझे कहना चाहिए। गलती तो मेरी है।’’
आभा भी सिसकते हुए बोली,‘‘साॅरी स्वरा। गलती तो मैंने भी की। बिना सारी बात जाने तुम पर हाथ उठाया।’’
स्वरा कभी आभा तो कभी करन को देख रही थी।
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