पाठशाला भीतर और बाहर तिमाही पत्रिका है। इसे अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय,बंेगलुरु प्रकाशित करता है। बाल साहित्य के बिना अधूरी है बच्चों की शिक्षा विषय पर सहभागी होने का मुझे भी अवसर मिला था। अंक का पीडीएफ प्राप्त हुआ है। परिचर्चा में जाने माने बाल साहित्य के अध्येता और पत्रिका के संपादन से जुड़े गुरबचन सिंह शामिल हैं। बाल साहित्य की पत्रिका चकमक के कई सालों संपादन से जुड़े राजेश उत्साही हैं। बाल साहित्य के प्रकाशन से जुड़ीं टुलटुल विश्वास भी हैं। इसके अलावा शिक्षक साथी विजय प्रकाश जैन एवं संगीता द्विवेदी ने भी अपने विचार रखे। पूरा आलेख इमेज के तौर पर यहाँ प्रस्तुत है-

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