आप रचनाकार हैं तो यह संवाद आपके लिए है।

‘‘मनोहर चमोली जी बोल रहे हैं?’’ ‘‘नमस्कार ! जी बोल रहा हूँ।’’‘‘जी, नमस्ते। मैं ABCD । xyz प्रकाशन का नाम तो सुना होगा आपने?’’‘‘जी जी। क्यों नहीं ! इस पब्लिकेशन…

जितना भी सीखा कम लगता है

कभी तीन साल एक बुनियादी स्कूल से जुड़ने का मौका मिला था। तब मैं स्नातक में था। प्रधानाध्यापिका अकेली थीं। गांधी जयंती, स्वतंत्रता और गणतंत्र दिवस में जाना होता था।…

‘पिता के बहाने’

आज पिताजी नहीं हैं। 15 नवम्बर 2019...! आज ही के दिन पिताजी रात दस बजे इस दुनिया को अलविदा कह चुके थे। पिताजी तीन बार श्वास का सदमा झेल चुके…

‘नया साल, कोरोना और हम’

किसी परिवार का एक सदस्य नहीं, दो नहीं....बल्कि सभी के सभी कोरोना पॉजीटिव हो जाएं तो चिंतित होना स्वाभाविक था। ................... बशीर बद्र साहब को कहाँ पता था कि उनका…

भाग्य, किस्मत, कुण्डली बनाम तकनीक, विज्ञान, ज्ञान

कोविड 19 ! जी हाँ। याद रहेगा। जनवरी 2020 में हम लोग इसे इतनी गंभीरता से नहीं ले रहे थे। लेकिन ट्रम्प नमस्ते कार्यक्रम के बाद हलकेपन ने करवट बदली…

कोई शब्द बुरा कैसे हो सकता है: कविता के बहाने

आम की टोकरी‘छह साल की छोकरी,भरकर लाई टोकरी।टोकरी में आम हैं,नहीं बताती दाम है।दिखा-दिखाकर टोकरी,हमें बुलाती छोकरी।हम को देती आम है,नहीं बुलाती नाम है।नाम नहीं अब पूछना,हमें आम है चूसना।यह…

पाठक, लेखक और संपादक सबके दायित्व गूँथे हुए हैं

-मनोहर चमोली ‘मनु’सूचना तकनीक के इस युग में भी पत्र-पत्रिकाओं की बाढ़-सी आई हुई हैं। मेरी सीमित जानकारी में ही चालीस से अधिक ऐसी पत्रिकाएँ हैं जो बच्चों के लिए…

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