मिल गए सात रंग


-मनोहर चमोली ‘मनु’
‘‘पापा आप कहाँ जा रहे हो?’’ नयना ने पूछा।
पापा ने नयना का गाल प्यार से छूते हुए जवाब दिया-‘‘ड्यूटी।’’ नयना ने कहा-‘‘पापा मेरे लिए कलर लाना। लाल वाला।’’ पापा ने हँसते हुए कहा-‘‘अच्छा।’’ पापा शाम को लौटे तो नयना ने पूछा-‘‘कलर लाए?’’ पापा कलर लाना भूल गए थे।
फिर एक दिन नयना ने पूछा-‘‘मम्मी आप कहाँ जा रही हो?’’ जवाब मिला-‘‘मार्केट।’’ नयना बोली-‘‘मम्मी मेरे लिए नारंगी वाला कलर लाना।’’ मम्मी मुस्कराई और चली गई। नयना ने शाम को पूछा-‘‘मम्मी आप कलर लायी?’’ मम्मी कलर लाना भूल गई थी।
फिर एक दिन नयना ने दादा जी से पूछा-‘‘दादा जी आप कहाँ जा रहे हो?’’ दादा जी ने जवाब दिया-‘‘मैं टहलने जा रहा हूँ।’’ नयना ने कहा-‘‘मेरे लिए पीला वाला कलर लाना।’’ दादा जी ने हाँ में सिर हिलाया और चले गए। नयना ने शाम को पूछा-‘‘कलर लाए?’’ दादा जी कलर लाना भूल गए थे।
फिर एक दिन नयना ने दादी जी से पूछा-‘‘आप कहाँ जा रही हो?’’ दादी ने बताया-‘‘बाजार। अपना चश्मा लेने।’’ नयना बोली-‘‘आप मेरे लिए हरा वाला कलर लाना।’’ दादी ने हाँ में सिर हिलाया और चली गई। नयना ने शाम को पूछा-‘‘आप कलर लायी?’’ दादी कलर लाना भूल गई थी।
फिर एक दिन नयना ने पूछा-‘‘चाची आप कहाँ जा रही हो?’’ जवाब मिला-‘‘सब्जी लेने।’’ नयना बोली-‘‘चाची मेरे लिए आसमानी कलर लाना।’’ चाची ने कहा-‘‘पक्का।’’ नयना ने शाम को पूछा-‘‘आप कलर लायी?’’ चाची कलर लाना भूल गई थी।
फिर एक दिन नयना ने चाचा जी से पूछा-‘‘चाचू आप कहाँ जा रहे हो?’’ चाचा जी ने बताया-‘‘घूमने।’’ नयना ने कहा-‘‘चाचू मेरे लिए कलर लाना। नीला वाला।’’ चाचा जी ने कहा-‘‘ठीक है।’’ नयना ने शाम को पूछा-‘‘चाचू आप कलर लाए?’’ चाचा जी कलर लाना भूल गए थे।
फिर एक दिन नयना ने भैया से पूछा-‘‘भैया आप कहाँ जा रहे हो?’’ भैया ने चहकते हुए बताया-‘‘अपने दोस्तों के साथ पिकनिक मनाने जा रहा हूँ।’’ नयना ने कहा-‘‘भैया मेरे लिए बैंगनी वाला कलर लाना।’’ भैया ने कहा-‘‘ओके।’’ नयना ने शाम को पूछा-‘‘भैया, कलर लाए?’’ भैया कलर लाना भूल गया था।
नयना रोने लगी। जोर-जोर से रोने लगी। इतना रोई, इतना रोई कि बारिश होने लगी।
‘‘क्या हुआ?’’ पापा ने पूछा। मम्मी ने पूछा। दादा जी ने पूछा फिर दादी जी ने पूछा। चाचा-चाचा दौड़कर आए। नयना थी कि रोती ही जा रही थी। आखिरकार नयना रोते-रोते सो गई।
रात को एक परी नयना से मिलने आई। परी ने कहा-‘‘नयना। अब मत रोना। सुबह तुम्हें सातों रंग मिल जाएँगे।’’
सुबह हुई। नयना ने खिड़की से बाहर देखा। सतरंगी इन्द्रधनुष आसमान से झाँक रहा था। नयना खिलखिलाकर हँसने लगी।
000

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!