बाल मन की कहानियाँ

”पिछले दो दिन गंगोलीहाट प्रवास में बीते। इस दौरान प्रतिष्ठित बाल साहित्यकार मनोहर चमोली मनु की बहु चर्चित किताब ‘कहानियां बाल मन’ की साथ रही। छोटी बड़ी चालीस कहानियों के इस संग्रह की बहुत सारी कहानियां खुद पढ़ी और बच्चों को सुनाई। कुछ कहानियों का बच्चों ने भी पाठ किया। बाल यूट्यूबर दिव्यांशु जोशी ने इस किताब का संक्षिप्त परिचय देते ‘छोड़ दिया फुदकना’ कहानी का पाठ अपने यूट्यूब चैनल में किया है। जो बच्चे अभी पढ़ना नहीं जानते हैं उन्होंने कहानियों को सुनने के साथ-साथ अनु प्रिया के चित्रों का खूब आनंद लिया। ‘भूत था क्या!’ कहानी ने बच्चों को विशेष रूप से प्रभावित किया। चार साल की एक बच्ची का खेल करते हुए अपने साथ के दूसरे बच्चे से यह कहना कि अरे! भूत नहीं होते हैं,वो तो खाली बच्चों को डराने के लिए कहते हैं,इस बात का प्रमाण है। मनोहर भाई को बधाई उनकी कहानियां बच्चों को पसन्द आ रही हैं।”

महेश पुनेठा

प्रख्यात साहित्कार महेश चन्द्र पुनेठा

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