कहानियाँ बाल मन की

चिकित्सक , कवयित्री और समीक्षक डॉ० अनुपमा गुप्ता जी समग्रता में साहित्य की अध्येता हैं | व्यस्त समय में से लिखने और पढ़ने के लिए समय निकालना आज सबसे बड़ा काम है । किताब खरीदना और पढ़ना, फिर पढ़कर उस पर अपनी राय देना तो और भी बड़ी बात है। इस आभासी दुनिया ने अपरिचित (जिनसे साक्षात् मुलाकात ही न हुई हो) लेकिन, सच्चे मित्र भी दिए हैं।
आभार देकर श्रम साध्य काम के मर्म को कम करना ही होगा।
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पुस्तक पढ़ी –

सुप्रसिद्ध एवं चर्चित साहित्यकार श्री मनोहर चमोली ‘मनु’ जी की किताब ‘कहानियाँ बाल मन की ‘ पढ़ी । यह किताब बाल साहित्य के वितान में यह एक नायाब तारा है ।पुस्तक का आवरण तथा अंदर के चित्र अनुप्रिया जी ने बनाए हैं । आवरण पृष्ठ जिज्ञासापरक एवं मोहक है । अंदर के श्वेत-श्याम चित्र भी कहानी को गति देते ,स्पष्ट करते और पुस्तक को रुचिकर बनाते हुए चलते हैंI मानव पात्र वाली कहानियों में अनुप्रिया जी की सृजनशीलता देखते ही बनती है ।
पुस्तक 5:30 X 8.5 इंच के डाइजेस्ट आकार में है । यदि यह क्वार्टर साइज 9:30 X 12 इंच के आकार में होती तो निश्चित तौर पर बच्चों को अधिक लुभाती । यहाँ भी हिंदी साहित्य की पुस्तकों के प्रकाशन में संसाधनों का अभाव दृष्टिगोचर होता है ।
संग्रह में कुल 40 कहानियां हैं । इनमें विभिन्न पारंपरिक एवं गैर – पारंपरिक विषयों को चुना गया है । घमंड का टूटना ,आज्ञा पालन , लालच बुरी बला , एकता में शक्ति , पर्यावरण सरोकार ,खाद्य श्रृंखला ,बड़ा कौन , दिव्यांगों के लिए संवेदना , सूचना एवं ज्ञानवर्धन, अनेकता में एकता ,सिखा दिया सबक , भाईचारा ,बच्चों की होशियारी,सफ़ाई का महत्व ,चमत्कार की पोल , संतुलित आहार ,समाजवाद आदि विषयों पर मनु जी ने लीक से हटकर कलम चलाई है । विशेष बात यह है कि अर्थपूर्ण कहानियाँ होने के बावज़ूद ज्ञान , नैतिकता और संदेश को पाठकों पर लादा नहीं गया है ।


मछली पानी में ही क्यों रहती होगी , बिल्ली दबे पाँव क्यों चलती है ,धरती सूरज का चक्कर क्यों लगाती होगी भला ऐसे अनेकानेक विषय हैं जो बालमन में उमड़ते-घुमड़ते रहते हैं । विज्ञान के सिद्धान्तों से सरोकार होने के भी पहले बच्चों की अपनी कल्पनाएँ होती हैं जिनमें वे इन प्रश्नों का उत्तर ढूँढ़ने का प्रयास करते हैं ।’अब मछली नहीं उड़ती ‘, ‘छोड़ दिया फुदकना’, ‘ छुट्टी नहीं करता सूरज’ आदि कुछ ऐसी ही कहानियाँ हैं जिनमें मनु जी के बालमन की कल्पना की उड़ान हमें भी देखने को मिलती है।
अधिकांश कहानियाँ दो सौ से तीन सौ शब्दों के बीच , कसी हुई भाषा में लिखी गई हैं । शब्दों और भावों का दोहराव नहीं है तथा पाठकों की कल्पना के लिए भी स्पेस छोड़ा गया है ।वाक्य छोटे -छोटे हैं , जिनके विन्यास में कोरी व्याकरण से अधिक व्यवहारिकता का ध्यान रखा गया है ।बच्चों को शब्दों और वाक्यों की आवृत्ति वाली रचनाएँ बहुत अच्छी लगती हैं इससे गद्य भी पद्य सा रसीला स्वरूप धर लेता है, यह जादू हमें कई जगहों पर देखने को मिलता है । कहानियाँ रुचिकर हैं, कौतूहल जगाती हैं । कहानियों में नाटकीयता का तड़का है और नवाचार की सुगंध भी ।
कहानियों के शीर्षक नयापन लिए हुए हैं । कहीं-कहीं कहानी की भूमिका ही इतनी चित्रात्मक लिखी गई है कि लगता है कि किसी नाटक के मंचन से पहले ही, मंचसज्जा से उसका संदर्भ और प्रसंग स्पष्ट हो रहा हो ! किसी भी कहानी का अंत, सबक देने वाले नीरस वाक्यों से नहीं हुआ है बल्कि यह दिखाया गया है कि फिर ऐसे ही जीवन चलता रहा । कहानी के इस गैर परंपरागत स्वरूप से बड़े और बच्चे अपने को बेहतर कनेक्ट कर पाते हैं ।
कहानियों में नए उपमानों एवं बालसुलभ मोहक वार्तालाप का प्रयोग किया गया है । मनु जी कहानियाँ इतना डूब कर लिखते हैं कि कहानी और पाठक के बीच से लेखक तत्व पूरी तरह गायब हो जाता है और ऐसा लगता है जैसे हम कोई चलचित्र देख रहे हों ।
लालच , ईर्ष्या, प्रतिस्पर्धा, होड़, चुगली ,ऊहापोह आदि जन्मजात मानवीय कमजोरियाँ हैं जिनसे बच्चे भी अछूते नहीं होते । मनु जी ने बहुत खूबसूरती से बच्चों में इन भावों को दर्शाया है जिससे कहानियाँ कोरे आदर्शवाद का दस्तावेज़ नहीं बल्कि बहुत स्वाभाविक लगती हैं ।
मनु जी अध्यापन से जुड़े हुए हैं और स्वयं एक अभिभावक भी हैं । विद्यार्थियों का सूक्ष्म निरीक्षण और उसकी सशक्त अभिव्यक्ति कहानियों को मनोवैज्ञानिक दृष्टि से एक नई ऊँचाई देती है । कहानियों के माध्यम से नई दृष्टि के साथ-साथ सकारात्मक चिंतन देने का हुनर भी लेखक के पास है ।
अब संक्षेप में कुछ विशिष्ट कहानियों की चर्चा : ' हवाई सैर' तितली की आकांक्षा , भय , आतुरता और ऊहापोह को प्रदर्शित करती अनेक रसों में डूबी कहानी है जो सामूहिकता के साथ पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश दे जाती है । ' ऊँट का पॉवर हाउस ' में वैज्ञानिक तथ्यों को कहानी के ताने-बाने में शानदार तरीके से बुना गया है । टूटती खाद्य श्रृंखला जैसे गंभीर विषय को ' मज़ाक़ अब नहीं ' कहानी में रोचक ढंग से प्रस्तुत किया गया है । कहानी' इंटरवल ' में लेखक ने अफ़रोज़, बयार , अल्बर्ट और कँवलजीत के साथ पूरे हिंदुस्तान को एक माला में पिरो दिया गया है । कहानी भाईचारे की संस्कृति के लिए प्रेरित करती है । 'टॉफी के बदले ' सूझबूझ और तर्कपूर्ण ढंग से लिखी कहानी है जिसमें एक आम हो चली समस्या का समाधान लेखक ने बच्चों से ही कराया है । ' बदल लिया मन में ' दो पीढ़ियों के वैचारिक मतभेद दिखाई देते हैं जिनमें एक के पास अनुभव तो दूसरे के पास नवाचार है । ' सॉरी साजिया ' में समाज के वंचित वर्ग की सुध ली गई है । पशु पक्षियों के इर्द-गिर्द घूम रही कहानियों की एकरसता सीधे अठारवीं कहानी के बाद टूटती है जिसे बेहतर संयोजन से टाला जा सकता था । प्रत्येक कहानी के साथ यदि उसकी क्रम संख्या भी दी गई होती तो पाठकों को सहूलियत होती । इसके अतिरिक्त दो से तीन पेज की कहानी में एक तरफ़ पेज नंबर की बजाए कहानी का नाम अंकित होने से पाठक बेहतर को -रिलेट कर पाता । चालीस कहानियों वाली पुस्तक को पढ़ना वास्तव में एक बड़ा लक्ष्य है । इन्हें दस-दस के समूह में वर्गीकृत कर पुस्तक को और अधिक दोस्ताना बनाया जा सकता था । वर्तनी में कुछ अशुद्धियाँ रह गई हैं जिन्हें बेहतर प्रूफ़रीडिंग से ठीक किया जा सकता था । कुछ वैज्ञानिक तथ्यों की दोबारा जाँच करने की जरूरत है जैसे कि शेर बिल्ली का वंशज है ( वस्तुतः बिल्ली शेर की वंशज है ), स्टार फिश एक मछली है ( यह इकाइनोडर्मेटा समूह से आती है और मछली नहीं कही जा सकती), ऑक्सीटॉसिन इंजेक्शन लगाते रहने से गाय बारहों महीने दूध देती रहेगी ( यह इंजेक्शन देने से दूध की मात्रा तो बढ़ती है पर दुग्ध उत्पादन की अवधि यथावत् रहती है ) आदि । महत्वपूर्ण बात यह है कि इतनी उम्दा , मनोरंजक , संदेशपरक कहानियाँ गढ़ने में न तो बड़े-बड़े कठिन वाक्यों का न ही मुहावरे वाली लच्छेदार भाषा का प्रयोग किया गया है उल्टे बहुत छोटे-छोटे वाक्यों को पूर्णविराम से अलग करते हुए पूरी बात कह दी गई है । कहानी के चित्रण में ,बीच के अनावश्यक विस्तार से बचा गया है जिससे कहानियाँ छोटी रोचक ,सहज और सुपाच्य 😀भी बन पड़ी हैं। मनु जी हिंदी पाठकों विशेषकर बाल पाठकों को इतनी सुंदर पुस्तक देने के लिए बधाई के पात्र हैं ।

पुस्तक : कहानियाँ बाल मन की
लेखक : मनोहर चमोली ‘ मनु’
आवरण एवं चित्रांकन : अनुप्रिया
मूल्य : 250 रुपए
पृष्ठ : 191
प्रकाशक : श्वेतवर्णा प्रकाशन, नई दिल्ली
फ़ोन-8447540078
लेखक सम्पर्क : 7579111144
प्रथम संस्करण : 2021
प्रस्तुति : डा. अनुपमा गुप्ता

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