• मैं भी दूंगा दाना

    -मनोहर चमोली ‘मनु’ आज से मासिक परीक्षा हैं। यह सोचकर अखिल जल्दी उठ गया। उसे चिड़ियों की चहचहाट सुनाई दी। वह आंगन में गया। आगन में करतार सिंह चावल के दाने बिखेर रहे…

  • लगन

    कोरोना के कारण स्कूल बंद थे। आज जब स्कूल खुला तो बच्चे अपना स्कूल भी नहीं पहचान पा रहे थे। कोरोना के कारण घर में रहकर क्या-क्या परेशानियां हुईं। मोबाइल से उन्होंने क्या…

  • यूँ ही कोई पहाड़ नहीं हो जाता : पुस्तक ‘चले साथ पहाड़’ के बहाने़

    चले साथ पहाड़ या चलें साथ पहाड़। एक ज़रा-सी बिन्दी मान लें या एक-अदद मात्रा। सारा मंतव्य बदल जाता है। जी हाँ। मैं सुप्रसिद्ध संस्कृतिकर्मी, साहित्यकार, यायावर और सामाजिक एक्टीविस्ट अरुण कुकसाल की…

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