आना सबके काम

-मनोहर चमोलीबर्फ़ पिघलकर चुपके चुपकेपहाड़ों से बह आती हैइठलाती बलखाती हैमधुर गीत वह गाती हैहर बाधा को पार है करतीआगे बढ़ती जाती हैप्यासी धरती, प्यासे जीवसबका मन हरषाती है।खेतों और…