कहानी नंबर 36 ‘मुस्कुराना हमेशा’

कहानियाँ बाल मन की संग्रह से एक कहानी

 “मनोहर चमोली मनु” 

कहानी नंबर 36 ‘मुस्कुराना हमेशा’

 आज के कहानी सत्र में बच्चों के संग यह कहानी साझा की। तितली की कहानियां तो बच्चों को वैसे भी बहुत अच्छी लगती है , परंतु नाहिदा और तितली के संवादरूप  में प्रस्तुत यह कहानी बच्चों को बड़ी मनमोहक लगी। क्योंकि उन्हें लगा कि यह उनकी ही कहानी है।

 आज कक्षा में लगभग 45 बच्चे उपस्थित थे । कहानी के माध्यम से तोते और कौवे की उम्र जानकर बच्चों को बहुत अचंभा हुआ और तितली की इतनी कम उम्र जानकर उन्हें बहुत दुख भी हुआ। इस कहानी के साथ संवाद के सीमित अवसर मिले, परंतु कक्षा में पढ़ने के लिए काफी सुगम माहौल बना । मैंने कक्षा 5 के इन बच्चों के साथ तितली का जीवन चक्र पर चर्चा की। कायांतरण शब्द पर वह बेहतर समझ बना पाए। इसके साथ ही चकमक मार्च 2022 के अंक में मेरा पन्ना कॉलम में प्रकाशित एक रचना भी मैंने कल ही  पढ़कर सुनाई थी जिसमें बालक(कनिष्क मालवीय, भोपाल, मध्य प्रदेश) ने तितली से संबंधित अपने अनुभव साझा किए थे,  वह संस्मरण आज जुड़ता दिखा। कहानियों की खास बात यही है कि वे आपस में जुड़ती, गूँथती, बँधती सी दिखती हैं तो हमारा पठन और भी रोचक होने लगता है। फिर बच्चों को लिखने के लिए प्रेरित किया। कहानी के अंत में परागण का जिक्र था जिस पर हमने विस्तार से चर्चा की। मुझे पता था कि यह विषय आगामी कक्षाओं के लिए है, परंतु खेल खेल में यदि कहानी के माध्यम से हम बच्चों को कुछ बता पाते हैं तो वह उनके चित्त में टिका रहता है, और पूर्व ज्ञान बनकर आगामी कक्षाओं में काफी मददगार होता है । अतः मुझे लगता है कि बच्चों से विभिन्न विषयों पर जानकारियां साझा करते रहना चाहिए । जैसे कि यह  किसी सुंदर विषय पर उनके मस्तिष्क में बीज बोने की यह एक प्रक्रिया है जो कहानियों के माध्यम से सरलता से हो जाती है।

 कहानी के साथ एक महत्वपूर्ण गतिविधि के रूप में मैंने इंटरनेट से ढूंढ कर कुछ जानवरों और उनकी उम्र सीमा पर बच्चों को जानकारी दी और एक चार्ट साझा किया।

 अंत में बच्चों ने कहानी पर सुंदर सुंदर चित्र बनाएं, जिसमें अपार विविधता थी। धर्मेंद्र के चित्र में नाहिदा का घर झोपड़ी नुमा दिखा जिस पर लौकी की बेल भी लसी हुई थी जबकि कुछ बच्चों ने एक बड़ा शानदार घर बनाया जिसकी बालकनी में नाहिदा गमलों में फूल लगाती या पानी खींचते दिखाई दी। करिश्मा का चित्र काफी मनोहारी दिखा जिसमें उसकी मां घर के भीतर कुछ कार्य कर रही है घर के बाहर हैंडपंप लगा है और शौचालय बना है ,घर के बाहर दीवार पर कपड़े भी सूख रहे हैं , उसने पूरा वातावरण प्रस्तुत किया है । जबकि संजीवनी साहू के चित्र में नाहिदा बिस्तर पर सोते सोते सपना देख रही है।

 प्रस्तुति : जय शेखर, प्राथमिक विद्यालय धुसाह प्रथम , बलरामपुर उत्तर प्रदेश ।

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